मेरा गजलहरू

परेलिको  आसू  पियेर  हासे
आधी  मरेर  आधी जियेर  हासे.
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बहारहरू  संग
रुदा  रुदा थाके  पछि
तुसारोका  घातहरू सम्जियेर हासें ।
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ओभाना  थियेनन
मेरा कुनै  बिहान  हरु
भिजेको  सीरानी  लिएर  हासे.
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रित्तो  रित्तो हनु  पनि
अनौठो  हुदोरहेछ
खुसी  पैचो  दिएर  हासे
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ज़िंदगी  फुल्नु  अनि
झर्नु  रैछ  क्रमश….
फूल  झै  भुइमा  खसे
ओइलियेर  हासे.

 

 
ताधी  को छाल

ताधिको  छाल संगै
रुनु हुन्न सानु
सदै  बालुवाको  बगर
हुनु हुन्ना सानु
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कति स्वार्थी  लोभी   पापी
संसार  छ  तिम्रो  यहा
आखा  चिम्ली  गुलाब पनि
छुनु  हुन्ना सानु
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हिजो  पनि रात भरि
के  के  रोयौ  रे
आसुले  नै  रुमाल  सारा
धुनु  हुन्ना सानु
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बाधी  राख   छाती भित्र
जति  दुःख परे पनी
सबै  सामु  मनको बेथा
फुनु हुन्न सानु

कहिले सानी  कहिले  ठुली
कहिले काली औसी
चन्द्रमा  नि  सधै  प्यारी
‘जुनु’ हुन्न सानु
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(3)
फूल झरे  पछि यहा
रित्तो रित्तो डाली भयो
तोलाई रह्ये उदास  उदास माली  भयो
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ऋतू  जस्ते  बदली रहने
हदों  रहेछा  माया  पनी
फिर्ता  देऊ भनेऊ   माया
मन मेरो  खाली  भयो.
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मायाको  रंगमंच  म
अविनय  गरेऊ  शायद
मेरोतिर  तिरस्कार  थ्यो
तिम्रोतिर  ताली  भयो
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आसू  संग  बग्यो  खुसी
न आस  छ  कतै
जीवन  आज रक्सानमा
मिल्कियेको  थाली  भयो
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बसंत  येहा  कहिले?
कतिखेर  आयो  बहार ?
सोच्दैच्छ  ‘कृसू ’ किन
येस्तो  येसपाली  भयो?
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सल्किएन  प्रेम दियो
चिराग  भयो अधुरो
घाऊ  निको  भए पनि
दाग भयो अधुरो
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न चरिले  गीत  गाई
न बहारले  सोध्नु  आयो,
न तिमि  नि डुल्नु  गयोऊ
वाग  भयो अधुरो.
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ओइएलिसके  पुष्प  हरु
व्रमर  हरु फ़र्के  सबै
सुगंध  छैना  येहा
पराग  भयो अधुरो.
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तिम्रै  छाया  कोरियेछ्न
मनको श्वेत  केनवास भरि
खाली थियो  निधार  माथी
सुहाग  भयो अधुरो
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मागेकै  के  थिए र?
एक अंजुली  माया त  हो
प्रतिक्सामा  थियो ‘कृसू’
माग  भयो अधुरो.
 
खुसी -तिमी अनि म

मेरो आधा  संसार लाई
सजाउछु  भनेकी  थ्यौ
हजूर  कै छाती वित्र
अटाउछु  भनेकी थ्यौ
!
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अधुरो छ मेरो कथा
अध्यारो  छ घर,
मायका  दीप हरु
जलौछु  भनेकी थ्यौ.
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सधै साथ दिने  बाचा
गरेकी  थ्यौ ‘खुसी’
आसु झर्न  खोजे  भने
समझाऊछू  भनेकी थ्यौ
~
धेरै छन  घाऊ हरु
ज़िंदगी नै दुखेको  छ
दुःख पर्दा पनी तिमी
रमाउ छू भनेकी थ्यौ
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नया  नया बहार आउदा
बिर्सियेकी   हौ  कि कुनी
‘कृसू’लाई सदै आफ्नो
बनाऊ  छू भनेकी थ्यौ.

 

 
खुसी तिमी अनि म
खुसी मनको आंगनिमा
पाईला   टेक्दा  कस्तो  हुन६?
बसंतमा  फुलै फुलले
बाटो  छेक्दा  कस्तो हुन्छ?
|
अस्तित्वको  खोजिवित्र
हराएको  मान्छे  लाई
धुंगा  खोज्दा  अनायास
देउता  वेट्दा  कस्तो हुन्छ ?
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ऐना  हेर्नु  कहिले काही
जून  तल  झर्छे  रे
जून संग  आफ्नो पनी
तस्वीर  देक्दा  कस्तो हुन्छ?
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समिप्याता  सधैवरी  किन
हुन्थ्यो  जिन्दगिमा
सम्जनाले  मनको लामो
दूरी  मेट्दा  कस्तो हुन्छ?
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‘कृसू’कै याद खिपी
प्रतेक  सेर हरु भित्र 
तिमिले   नि  एउटा  मीठो
ग़ज़ल  लेक्दा  कस्तो  हुन्छा???

 

 
यसपाली नि

यसपाली नि आएन  खै
बहार  सोचेजस्तो
भेटिएन  मन बुझाउने 
आधार  सोचे जस्तो ,
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उ  त  कतै  भूल्न  सक्छ
अर्को  दिलमा  बास पाए
कहा छ  र  तिम्रो  आफ्नै
दिलदार  सोचे जस्तो
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एक्लै  आउछन अझ  कति
मदनका  साथी  हरु
हुदैन  मनिसको
ब्यबहर  सोचेजस्तो

रगतको  टाटो  कतै
निरासाका  दाग हरु
किन छैन  कसैको  नि
अनुहार  सोचे जस्तो
|
चट्टान  संग  ठोकियेर
कृसू  बल्ल  पाखा  लाग्यो
थियेन  नदिको
त्यो  किनार  सोचे जस्तो.
 
अन्धकार
निस्पट्ट  अन्धकार
औसिको  राती  थियो
रातजस्ता  गज़लहरू
नलेखे  कै जाती  थियो
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पोख्दै  गए मनको  टुकरा
कगजको  टुकरा माथी
येस्तो  लाग्यो येही  ग़ज़ल
बिरहीको   साथी थियो
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येस्सो  छामी  हेरे  कतै
खुसी  अल्जिएको  छ  कि
बालुवाको  बगर जस्तो
मरुभूमि  छाती थियो.
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भक्कानो  त्यों बल्जी  रह्यो
शनै  शनै छाती भित्र 
पत्थर  जस्तो कुनी  के  हो
मेरो  मुटु  माथी थियो
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ढाकी  दियो  बाद्लू  ले
आशा  का ती  क्षितिज़्हरू
कृसुका  धेरै   सपना
देउराली  मा  थाती  थियो.

 

 
रुन्छ
रुन्छ आफ्नो  मन
आफै  संग हारी  जब
गाह्रो  हुन्छ  आफैलाई
जिन्दगिको  भारी जब
|
मेरो  मनको वातिकामा
एउटापनी  फूल  छैन
आसु  खस्छ  देक्दा रित्तो
रित्तो फुलबारी  जब
|
बिर्सी  दिनु  फुलै  फुलको
बाटो  हिड्दा  खेरी
सम्जनु  कांड़ा  बिच
अल्झी  दिन्छ  सारी  जब
|
भौतारी दै  धुवा जस्तै
एक्लै हिददै  रहे,
कतै भेतियेना  राजै
शीतल  छहारी  जब
|
नियालेर  हेर्नु  कतै
कृसू पनी  हुन  सक६
तिम्रो आंगन बाट  हिडछ
विक्षिप्त  भिकारी  जब।.
 
मग-मग
सागर  चुम्न  लालायित
मुना झै लाग्छौ तिमी
मग-मग सुवासित
प्रसुना झै लाग्छौ तिमी
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कैले येता  कैले  उता
छम  छम नर्तन  गर्ने
चंचल त्यो चौबंदिको
तुना झै लाग्छौ तिमी
|
धिप  धिप बत्ती  आंखा
अलंकारले  सुशोवित
परी खेलने स्वर्गको  त्यों
कुना  झै  लाग्छौ तिमी
|
परै  बाट  गाज़लू  नयन
हेर्छु  जब  जब
जादू  मंत्र मोहनी
तुना  झै लाग्छौ  तिमी
|
लहर  संग खेल्दै  खेल्दै
ताजमहल  छेउ बाट
कतै  जान लम्कियेकी
येमुना  झै लाग्छौ  तिमी
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गज़ल
हामीले  रच्ने  गज़लको  किन
बिसय  येस्तै हुन६?
रगत  युद्द र  मृत्यु
आशय   येस्तै हुन६|
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पोखरी  मा सानो  माछा
सधै  त्रास  मा बाचेको  ६
के मान्छे  बिच  पनी
परिचय येस्तै हुन६?
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मृत्यु पढछु ख़बर भरि
दर्ज़नौ  हताहत  छन
सदै युद्द -द्वन्द  सायद
प्रलय  येस्तै हुन६ .
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आज पनि कर्फ्यू  छ की
दागिने  पो  हो की छाती
हरेक को मनमा  किन
भय येस्तै हुन्छ

खै  कस्लाई  जीते  भन्नु।।
कुन मनले जीते  भन्नु
लास  माथी उभीएको
बिजय  येस्तै  हुन्छ
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